11168>|| भय--क्यों--केया ||

   11168>|| भय--क्यों--केया ||

   <-- आद्यनाथ-->

भय तब होते है,

जब विश्वास कमजोर होजाते है।

सच्ची श्रद्धा से डर मिट जाता है।

शिव जी को विश्वास कीजिए,

संपूर्ण मनसे श्रद्धा रखिए।

सच्चा श्रद्धा विश्वास से जीवनंकी सारे इच्छा पूर्ण होते है।

शिर में स्थान दीजिए शिवजी को,

हृदय में रखिए हनुमान जी को।

कुछ भी खाना खानेकी पहले ईश्वर को अर्पण कीजिए।

ईश्वर को अर्पण बिना कुछ भी नहीं खाना है।

जानिए यही जीवन धारण की श्रेष्ठ उपाय।

हर उपार्जन की २५%संचय करणा जरूरी।

संचय की कुछ हिस्सा दान जरूरी।

किन्तु दान होना चाहिए सच्चे स्थान पर।

अतः दान के पहले जांच-पड़ताल जरूरी।

बंदर की गले में मोती की माला व्यर्थता की ज्वाला,

दुष्ट ,बेईमान,अलस, ढंगी को आर्थिक सहायता  देना अक्सर नकारात्मक परिणाम लाता है।

अतः दान के पहले सावधानता जरूरी।

    <--आद्यनाथ राय चौधूरी-->

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